पटना: बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। बुधवार (3 दिसंबर) को सदन में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का अभिभाषण हुआ। इस दौरान तकनीकी दिक्कत के कारण उनका माइक भी खराब हो गया, लेकिन सत्र का सबसे बड़ा मुद्दा रहा — तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी।
तेजस्वी यादव को मंगलवार (2 दिसंबर) को ही विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चुना गया था। इसके ठीक एक दिन बाद वे राज्यपाल के अभिभाषण वाली बैठक में शामिल नहीं हुए। इसी पर एनडीए नेताओं ने उनकी गंभीरता पर सवाल खड़े किए।
👉 LJP (R) का हमला
एलजेपी (रामविलास) के विधानमंडल दल के नेता राजू तिवारी ने कहा कि तेजस्वी यादव सदन को गंभीरता से नहीं लेते।
उनका आरोप था —
“तेजस्वी यादव को जनता से कोई मतलब नहीं है। इतने अहम दिन राज्यपाल का अभिभाषण हुआ, लेकिन नेता प्रतिपक्ष मौजूद नहीं थे। बड़े पद पर रहकर वे क्या संदेश देना चाहते हैं?”
👉 BJP ने भी साधा निशाना
बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री नीरज बबलू ने कहा कि तेजस्वी यादव चुनाव में जनता द्वारा नकारे जाने के बाद से हताश हैं।
उन्होंने कहा —
“आज उन्हें जरूर सदन में रहना चाहिए था। उनका बिहार के विकास से कोई लेना-देना नहीं है।”
👉 RJD का पलटवार
आरजेडी की ओर से MLC उर्मिल ठाकुर ने एनडीए के आरोपों को “बेसिर-पैर का मुद्दा” बताया।
उन्होंने कहा —
“राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान कोई चर्चा नहीं होनी थी, इसलिए तेजस्वी यादव की मौजूदगी जरूरी नहीं थी। बिना तेजस्वी का नाम लिए इनकी राजनीति चल ही नहीं सकती।”
👉 तेजस्वी यादव अचानक दिल्ली रवाना
सूत्रों के मुताबिक, नेता प्रतिपक्ष मंगलवार शाम पटना से दिल्ली रवाना हो गए। एयरपोर्ट पर उन्होंने मीडिया से बातचीत भी नहीं की। उनकी दिल्ली यात्रा को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
शीतकालीन सत्र में यह पहला मौका है जब तेजस्वी यादव की भूमिका को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सत्र के अगले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ने की संभावना है।
